*INDIA CRIME NEWS बीमार महिला को ग्रामीणों ने डंडी कंडी से 5 किमी पैदल चलकर पहुंचाया अस्पताल*

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*INDIA CRIME NEWS बीमार महिला को ग्रामीणों ने डंडी कंडी से 5 किमी पैदल चलकर पहुंचाया अस्पताल*
*जान जोखिम में डालकर उफनते नालों व अस्थायी पुलों को किया पार*
उत्तरकाशी। जनपद में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। भूस्खलन और मलबा आने से मोरी विकासखंड समेत कई इलाकों के संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं। सड़कें बाधित होने से सबसे अधिक परेशानी बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। कई गांवों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर लोग जान जोखिम में डालकर उफनाते नालों और अस्थायी रास्तों से आवाजाही करने को मजबूर हैं।
मोरी विकासखंड के रेक्चा गांव में बीते दिन सड़क बंद होने के कारण एक बीमार महिला को उपचार के लिए करीब पांच किलोमीटर तक डंडी-कंडी के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार गांव निवासी सपना पत्नी आनंद सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। परिजनों ने वाहन की व्यवस्था करने का प्रयास किया, लेकिन पिछले करीब एक सप्ताह से सड़क बंद होने के कारण कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। ऐसे में ग्रामीणों ने महिला को डंडी-कंडी पर बैठाकर करीब पांच किलोमीटर दूर बेंचा पुल तक पहुंचाया, जहां से हंस फाउंडेशन की एंबुलेंस के जरिए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी ले जाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि महिला का दो माह का शिशु भी है। सीएचसी मोरी के प्रभारी डॉ। नितेश रावत ने बताया कि महिला का उपचार जारी है और अब उसकी हालत स्थिर है।उधर, मोरी के दूरस्थ कलाप गांव में बीते सोमवार रात हुई अतिवृष्टि के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। गांव के नीचे भू-धंसाव और ऊपर से लगातार भूस्खलन होने से ग्रामीण भय के साये में जीवन बिता रहे हैं। गांव को जोड़ने वाली सड़क और पैदल मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पिछले दस दिनों से बिजली और पांच दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप है, जबकि बरसात के लिए आवश्यक तीन माह का राशन भी गांव तक नहीं पहुंच पाया है।
आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाई ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों को सभी बंद ग्रामीण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए गए हैं। विभिन्न स्थानों पर मशीनें लगाकर मार्ग खोलने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को जल्द राहत मिल सके।
ग्राम प्रधान मनवीर सिंह राणा ने बताया कि 27 जुलाई को आई आपदा के बाद गांव के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। कई मकानों के नीचे की जमीन धंस रही है, जबकि ऊपर से लगातार मलबा और पत्थर गिर रहे हैं। पेयजल लाइन, पानी की टंकी और कई भवन भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बृहस्पतिवार को गांव की शुभनी देवी का पैर फ्रैक्चर होने पर उन्हें चार किलोमीटर तक क्षतिग्रस्त पगडंडी और उफनाते नालों के बीच से पैदल सड़क तक लाया गया। उन्होंने बताया कि लगातार हो रहे भू-धंसाव के कारण ग्रामीण पिछले पांच दिनों से रातभर सो नहीं पा रहे हैं।
वहीं, सांकरी-ओसला मोटर मार्ग पर गियांगाड का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों द्वारा बनाई गई अस्थायी पुलिया बह गई। इस दौरान ओसला निवासी खजान सिंह पुलिया के साथ बह गए। करीब 20 से 30 मीटर तक बहने के बाद उन्होंने पेड़ की टहनी पकड़कर किसी तरह अपनी जान बचाई, हालांकि वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद पुरोला रेफर किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिया बहने के बाद ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और पवाणी समेत कई गांवों का संपर्क विकासखंड मुख्यालय से कट गया है। मजबूरी में लोग तेज बहाव वाले नाले पर गिरे पेड़ के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

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