*INDIA CRIME NEWS दो महीने में दूसरी बार ढही सुरक्षा दीवार, केदारनाथ हाईवे पर बड़ा सवाल*
*रामपुर बाजार के संवेदनशील भूस्खलन जोन में फिर ध्वस्त हुआ पुश्ता, व्यापारियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश
‘करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं मिला स्थायी समाधान’, वैज्ञानिक ट्रीटमेंट की उठी मांग*
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामपुर बाजार के समीप स्थित संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र में बनाई गई सुरक्षा दीवार (पुश्ता) एक बार फिर भरभराकर ढह गई। चिंताजनक बात यह है कि महज दो माह के भीतर यह दूसरी बार है, जब इसी स्थान पर सुरक्षा दीवार ध्वस्त हुई है। घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में कार्यदायी संस्था एवं संबंधित विभाग की कार्यशैली को लेकर भारी नाराजगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सुरक्षा दीवार को भू-धंसाव रोकने के लिए बनाया गया था, वह पहली ही बारिश की परीक्षा में असफल साबित हो गई। अब दूसरी बार ढहने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

यात्रा शुरू होने से पहले पूरा होने का दावा, पहली बारिश में ही धंस गया पुश्ता
जानकारी के अनुसार, इस संवेदनशील स्थल पर सुरक्षा कार्य फरवरीदृमार्च में शुरू किया गया था और चारधाम यात्रा प्रारंभ होने से पहले इसे पूरा करने का दावा किया गया। लेकिन जून के प्रथम सप्ताह में हुई बारिश के दौरान ही पुश्ता धंस गया। उस समय राजमार्ग विभाग ने निर्माण कार्य में खामियों को स्वीकारते हुए दोबारा बेहतर गुणवत्ता और मजबूत तकनीक से कार्य कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद गत दिनों पुश्ते में दरारें दिखाई देने लगीं और बुधवार रात हुई तेज बारिश के दौरान पूरी सुरक्षा दीवार फिर से ढह गई। इससे स्थानीय लोगों में विभागीय दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस स्थान पर वर्षों से लगातार भू-धंसाव हो रहा है, लेकिन विभाग हर बार करोड़ों रुपये खर्च कर केवल अस्थायी और कामचलाऊ निर्माण करता है। उनका कहना है कि जब तक इस क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन और स्थायी भू-तकनीकी उपचार नहीं किया जाएगा, तब तक हर बारिश में यही स्थिति बनी रहेगी। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन और तकनीकी मानकों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भूस्खलन क्षेत्र सीधे रामपुर बाजार के ऊपर स्थित है। यदि समय रहते प्रभावी उपचार नहीं किया गया तो लगातार हो रहा भू-धंसाव बाजार और आसपास के भवनों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल विशेषज्ञ संस्थाओं से भू-वैज्ञानिक सर्वे कराकर स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। पूर्व ग्राम प्रधान प्रमोद सिंह रावत ने कहा कि इस क्षेत्र में लंबे समय से भू-धंसाव की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि विभाग को केवल दीवार बनाने के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक से पूरे ढलान का उपचार करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
*होटल कारोबारी बोलेकृदो साल से काम, नतीजा शून्य*
रूद्रप्रयाग। स्थानीय होटल व्यवसायी संदीप सिंह रावत ने कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों से विभाग इस क्षेत्र में अलग-अलग चरणों में कार्य कर रहा है, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों को कई बार इस भू-धंसाव से बाजार पर पड़ने वाले संभावित खतरे से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की कि इस संवेदनशील स्थल का विशेषज्ञ संस्थाओं से विस्तृत भू-वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के माध्यम से स्थायी सुरक्षा कार्य कराया जाए।
*स्थायी समाधान की मांग तेज*
रूद्रप्रयाग। लगातार दूसरी बार सुरक्षा दीवार ढहने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय निवासी नितिन जनलोकी ने कहा कि यदि समय रहते इस संवेदनशील क्षेत्र का वैज्ञानिक उपचार नहीं किया गया तो भविष्य में यह समस्या केवल सड़क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रामपुर बाजार और आसपास के क्षेत्र के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। ऐसे में अब सभी की निगाहें शासन और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

