*INDIA CRIME NEWS जसपाल राणा के पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा दून*

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*INDIA CRIME NEWS जसपाल राणा के पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा दून*

मुख्यमंत्री सहित कई नेता व समाज सेवी श्रद्धांजलि देने पहुंचे
देहरादून। भारत के दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का आज 12 जून शुक्रवार को दिल्ली में निधन हो गया। उनका पार्थिक शरीर देर शाम को उनके आवास देहरादून पहुंचा। दिवंगत जसपाल राणा के अंतिम दर्शन करने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत पूर्व सीएम हरीश रावत के अलावा प्रदेश की तमाम राजनीतिक और खेल से जुड़ी हस्तियां उनके घर पहुंची। इस दौरान जसपाल राणा की शिष्य और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी भावुक दिखाई दी।

अपने कोच और मार्गदर्शक को श्रद्धांजलि देने पहुंचीं ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर इस दौरान भावुक नजर आईं। पार्थिव शरीर के सामने पुष्प अर्पित करते समय वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं। मनु भाकर ने जसपाल राणा को भारतीय निशानेबाजी का एक युग बताया और कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। जसपाल राणा के निधन की खबर से पूरे खेल जगत में शोक की लहर है। उनके आवास पर सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसपाल राणा को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण समेत कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने राणा के निधन को खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जसपाल राणा का जाना उत्तराखंड के साथ-साथ पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति हैं। जसपाल राणा खेल के सितारे थे, जिन्होंने खेल जगत में भारत का नाम रोशन किया। साथ ही कई खिलाड़ियों को देश के लिए खेलने के लिए तैयार किया। भारत का पदक दिलाने के लिए उनका खेल और कोचिंग दोनों काम आए। ये हम सबके के लिए ऐसे क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती है।

बता दें कि, जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे बड़े नामों में शुमार थे। उन्होंने अपने शानदार करियर में कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 23 पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। खिलाड़ी के साथ-साथ कोच के रूप में भी उन्होंने कई प्रतिभाओं को तराशा। मनु भाकर समेत अनेक निशानेबाजों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन को अहम माना जाता है।


दरअसल, जसपाल राणा विश्व कप प्रतियोगिता के सिलसिले में जर्मनी गए थे। वहां से लौटने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया। पिछले कई दिनों से उनका उपचार चल रहा था, लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार शाम उनका पार्थिव शरीर देहरादून के पोंधा स्थित मझौन गांव स्थित आवास लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।

परिवार के अनुसार शनिवार को उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जाया जाएगा, जहां मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। जसपाल राणा के निधन से उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे खिलाड़ी, कोच और प्रेरणास्रोत को खो दिया है, जिसने अपनी प्रतिभा और समर्पण से देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई।

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