*INDIA CRIME NEWS बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच तेज,40 दिन की सीसीटीवी फुटेज खंगालेगी टीम*

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*INDIA CRIME NEWS बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच तेज,40 दिन की सीसीटीवी फुटेज खंगालेगी टीम*

चमोली। श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए गठित जांच समिति पिछले करीब 40 दिनों की सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह पहली बार हुई घटना थी या लंबे समय से इस प्रकार की अनियमितता चल रही थी। साथ ही यह भी जांच के दायरे में है कि इसमें केवल आरोपित कर्मचारी ही शामिल था या अन्य कर्मचारियों अथवा अधिकारियों की भी भूमिका रही है।
जांच एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य सीसीटीवी फुटेज को माना जा रहा है। मंदिर परिसर में लगे 32 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को बारीकी से खंगाला जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक कैमरे की फुटेज में आरोपित कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तुएं लेते हुए दिखाई दिया है। जांच टीम विभिन्न कैमरों की रिकॉर्डिंग का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट करने में जुटी है।

जांच केवल आरोपित कर्मचारी तक सीमित नहीं है। यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर की व्यवस्था और चढ़ावे की निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका क्या रही। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता अथवा लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार आरोपित कर्मचारी वर्ष 2003 में इंटरनेट ऑपरेटर के रूप में नियुक्त हुआ था। वर्ष 2012 में शासन के स्वीकृत पदों में उसका पद भी शामिल हुआ। वर्ष 2014 में बोर्ड की बैठक में नियुक्ति को स्वीकृति मिली और 2017 में उसे मंदिर समिति में नियमित जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2026 में पहली बार उसकी तैनाती बदरीनाथ धाम में की गई, जहां उसे चढ़ावे की गणना से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इस बीच भैरव सेना संगठन ने मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि विभागीय जांच से जनता का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं होगा। संगठन ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

*दान की प्रत्येक वस्तु का रखा जाता है रिकॉर्ड*
मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोना, चांदी, नकदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की गणना निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है। पहले सोना और चांदी अलग किए जाते हैं, इसके बाद नकदी की गिनती होती है। प्रत्येक वस्तु का विवरण रजिस्टर में दर्ज कर उसे सुरक्षित रखा जाता है। जांच समिति अब इस पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है कि कहीं किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

*दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा रू मंदिर समिति*
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

*कांग्रेस ने समिति की जांच पर उठाए सवाल*
उधर, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मंदिर समिति द्वारा कराई जा रही जांच पर संदेह व्यक्त करते हुए मामले की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर अनियमितता और चोरी के आरोप लग रहे हैं, उन्हीं के अधीन जांच कराना निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।

गोदियाल ने कहा कि बदरीनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी “करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर डकैती” के समान है। उन्होंने मांग की कि मामले की न्यायिक या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके पदों से हटाया जाना चाहिए, जिससे जांच निष्पक्ष रूप से हो सके। फिलहाल पूरे मामले में सभी की निगाहें 40 दिनों की सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं रिकॉर्डिंग के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि कथित गड़बड़ी एक अकेली घटना थी या इसके पीछे कोई सुनियोजित और लंबे समय से चल रहा तंत्र सक्रिय था। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा

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