*INDIA CRIME NEWS 15 दिन में नहीं सुलझीं चोपता की समस्याएँ तो होगा आमरण अनशन, जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को सौंपा अल्टीमेटम पत्र*
तल्लानागपुर क्षेत्र के विकास, अधूरी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने उठाई आवाज,
रुद्रप्रयाग। विकासखंड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत तल्लानागपुर क्षेत्र का प्रमुख केंद्र चोपता बाजार आज भी अनेक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यह बाजार क्षेत्र की कई ग्राम सभाओं को जोड़ने वाला प्रमुख व्यापारिक एवं सामाजिक केंद्र है, जहाँ प्रतिदिन हजारों ग्रामीणों का आवागमन होता है। बावजूद इसके यहाँ पार्किंग, पेयजल, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता, सार्वजनिक शौचालय और उच्च शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
चोपता बाजार तल्लानागपुर क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार है। आसपास के गाँवों के लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इसी बाजार पर निर्भर हैं। कृषि, बागवानी एवं स्थानीय उत्पादों का व्यापार भी इसी बाजार के माध्यम से होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। यह बाजार सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ लोग क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं। चांदधार में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला तल्लानागपुर औद्योगिक विकास, कृषि, पर्यटन एवं महोत्सव भी इस क्षेत्र की पहचान को नई ऊंचाई देता है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि चोपता बाजार में आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाए, पार्किंग का निर्माण हो, यातायात व्यवस्था सुदृढ़ की जाए, डिग्री कॉलेज की स्थापना हो तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए, तो यह क्षेत्र व्यापार, पर्यटन और रोजगार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
इन्हीं मांगों को लेकर चोपता वार्ड से जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी विशाल मिश्रा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तल्लानागपुर क्षेत्र की वर्षों से लंबित प्रमुख समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने अधूरे पड़े पॉलिटेक्निक भवन के निर्माण कार्य, चोपता बाजार में स्वीकृत पार्किंग निर्माण, तल्लानागपुर पेयजल फेस-2 योजना को पूर्ण कराने तथा तल्लानागपुर-तुंगनाथ पेयजल योजना के पुनर्गठन की मांग प्रमुखता से उठाई।
जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इन समस्याओं का समाधान 15 दिनों के भीतर नहीं किया गया तो क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधि आमरण अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

