*INDIA CRIME NEWS लोक पर्व हरेला को ब्लैक हरेला के रूप में मनाया*

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*INDIA CRIME NEWS लोक पर्व हरेला को ब्लैक हरेला के रूप में मनाया*

ऋषिकेश। गुरूवार को  पूरे उत्तराखंड में पारंपरिक लोकपर्व हरेला मनाया गया। हरेला पर्व को हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। हर साल राज्य सरकार हरेला पर्व पर बड़े स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित करती है। जगह-जगह वृक्षारोपण कर हरियाली बचाने का संदेश देती है। लेकिन, इसी के उलट देहरादून ऋषिकेश मार्ग पर सात मोड़ के पास विकास के नाम पर करीब 3 हजार पेड़ों की बलि दी जा रही है। इसका पिछले कुछ दिनों से सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् विरोध कर रहे हैं।

सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमी पिछले कई दिनों से पेड़ों की कटाई का विरोध करते हुए पेड़ों के कटान वाले स्थान पर डटे हुए हैं। संगठनों का कहना है कि एक तरफ हरेला पर सरकारी विभाग और सामाजिक संगठन हजारों पौधे लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ फोरलेन चौड़ीकरण के नाम पर हजारों हरे-भरे पेड़ों की बलि दी जा रही है। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी काले कपड़े पहने मौके पर जुटे रहे और पेड़ों की बलि देने के खिलाफ हरेला पर्व को ब्लैक हरेला के रूप में मनाया। विरोध करने वाले लोगों ने मौके पर मौजूद एक 50 साल से अधिक पुराने वृक्ष के आगे खड़े होकर पेड़ों की बलि के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। मौके पर मौजूद एक महिला पर्यावरण प्रेमी शालू ने पेड़ की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह पेड़ कल आप लोगों को नजर नहीं आएगा। इसे आज आखिरी बार देख लो। क्या सरकार इसे रेगिस्तान, दुबई या कंक्रीट का जंगल बनाना चाहती है। आरी चलाने वाला भी थकता है तो इन्हीं पेड़ों के छांव के नीचे आराम करता है। प्रदर्शनकारियों को रोकने वाले अधिकारी, कर्मचारी भी इन्हीं पेड़ों की छांव के नीचे अपनी थकान मिटाते हैं। बता दें कि देहरादून से ऋषिकेश के बीच भनियावाला-ऋषिकेश फोरलेन चौड़ीकरण परियोजना के तहत सात मोड़ के पास लगभग 3 हजार पेड़ काटे जाने हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि मोड़ को सीधा करने के लिए हजारों पेड़ों की बलि देना पर्यावरण संरक्षण पर सीधा कुठाराघात है।
जिम्मेदार विभाग का कहना है कि, सात मोड़ पर जाम से बचने के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है और सात मोड़ को खत्म करके सीधा फोरलेन सड़क तैयार किए जाने की परियोजना है।

 

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