*INDIA CRIME NEWS डेडलाइन खत्म, लेकिन पूरी नहीं हो पाई बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामले की जांच,शासन ने जांच के लिए एक महीने का समय और बढ़ाया*
देहरादून। बदरीनाथ चोरी प्रकरण की जांच तय समय सीमा पूरी होने के बाद भी खत्म नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि अब इस जांच को पूरा करने के लिए एक महीने का वक्त बढ़ा दिया गया है। इसमें जांच कमेटी गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में छूटे हुए तमाम तथ्यों पर काम करेगी। हालांकि इस 1 महीने में भी जांच पूरी हो पाएगी ये कहना मुश्किल है।
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की रकम में अनियमितता और चोरी के मामले की जांच तय समय सीमा के भीतर पूरी नहीं हो पाई है। जिस उच्चस्तरीय जांच समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी थी, उसे अब एक महीने का अतिरिक्त समय दे दिया गया है। यानी गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति को अब 7 सितंबर 2026 तक जांच पूरी करने का वक्त मिला है। हालांकि समिति के सामने अभी कई तथ्य और बिंदुओं की पड़ताल बाकी है, ऐसे में सवाल यही है कि क्या अतिरिक्त एक महीने में जांच पूरी हो पाएगी?
दरअसल बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे में कथित अनियमितता का मामला सामने आने के बाद जांच का सिलसिला शुरू हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस स्तर पर एसआईटी जांच शुरू की गई, वहीं शासन ने पूरे प्रकरण के प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं की पड़ताल के लिए अलग से उच्चस्तरीय समिति का गठन किया।
शासन ने 7 जुलाई को गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति में गढ़वाल मंडल विकास निगम के एमडी संदीप तिवारी और एक वित्त अधिकारी को भी शामिल किया गया। समिति को एक महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंपनी थी, लेकिन तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो सकी।
समिति ने शासन से अतिरिक्त समय की मांग की, जिसके बाद जांच के लिए एक और महीने की मोहलत दी गई है। अब समिति को 7 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। समिति की जांच में अभिलेखों का परीक्षण, संबंधित लोगों के बयान और मामले से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शामिल हैं। इसके अलावा आम लोगों से भी इस मामले से संबंधित शिकायत या सबूत उपलब्ध कराने की अपील की गई है। ऐसे में जांच का दायरा केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि चढ़ावे के प्रबंधन और उससे जुड़े पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
दूसरी तरफ इस पूरे मामले में एसआईटी की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ी है। जांच के दौरान बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल का नाम सामने आया। जानकारी के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में उसे दान-गणना कक्ष में नकदी और चढ़ावे के लिफाफों को संदिग्ध तरीके से हटाते हुए देखा गया था। एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज के साथ उसके कॉल रिकॉर्ड समेत दूसरे साक्ष्यों की भी पड़ताल की।
इसके बाद एसआईटी ने प्रमोद नौटियाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच की आंच मंदिर समिति के अध्यक्ष से जुड़े लोगों तक भी पहुंची। इसके बाद 17 जुलाई को एसआईटी ने बदरीनाथ मंदिर के पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार किया। राजेंद्र चौहान 30 जून को अपने पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी गिरफ्तारी को भी मामले में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई माना गया।
इसके बाद 7 अगस्त को चढ़ावा चोरी मामले में तीसरी गिरफ्तारी हो गई। एसआईटी यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने मनोज कुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी मनोज कुमार जेपी पावर वेंचर्स लिमिटेड की लामबगड़ जल विद्युत परियोजना में सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत था। पुलिस की मानें तो कंपनी के अधिकारियों के मेहमानों और रिश्तेदारों को वीआईपी दर्शन कराने के लिए उसे समय-समय पर मंदिर भेजा जाता था।
यानी एक तरफ पुलिस की एसआईटी जांच में गिरफ्तारियों और साक्ष्यों की पड़ताल का सिलसिला चल रहा है, तो दूसरी तरफ शासन की उच्चस्तरीय समिति पूरे मामले के प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं को खंगाल रही है। यही वजह है कि अब दोनों जांचों के निष्कर्ष इस मामले की तस्वीर साफ करने में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
बदरीनाथ चढ़ावा प्रकरण की खास बात यह है कि इसकी जांच एक ही स्तर पर नहीं हो रही। एक तरफ एसआईटी आपराधिक पहलुओं और आरोपों से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। दूसरी तरफ गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है। इसके अलावा बदरी-केदार मंदिर समिति के स्तर पर भी आंतरिक जांच की प्रक्रिया चल रही है। सवाल यह भी है कि आखिर चढ़ावे की रकम और अन्य सामग्री के प्रबंधन में ऐसी स्थिति कैसे बनी और निगरानी व्यवस्था के बावजूद कथित अनियमितताएं कैसे होती रहीं? मामले में सीसीटीवी फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा बना है। धाम में नए सीसीटीवी कैमरे 1 जून को लगाए गए थे और 2 जुलाई की घटना को लेकर जांच आगे बढ़ी।
उच्चस्तरीय समिति के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने की है। गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप के मुताबिक शासन स्तर से समिति गठित की गई थी और जांच जारी है। जांच के कुछ तथ्य अभी छूटे हुए हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए शासन से अतिरिक्त समय मांगा गया था और अब एक महीने का समय मिल गया है। हालांकि जांच समिति के अध्यक्ष ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि आखिर कौन-कौन से तथ्य अभी बाकी हैं। उनका कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले इससे जुड़े विवरण सार्वजनिक करना उचित नहीं है।
ऐसे में 7 सितंबर की नई डेडलाइन अब बेहद अहम हो गई है। लेकिन मानसून, कांवड़ यात्रा और प्रशासनिक स्तर पर अन्य जिम्मेदारियों के बीच पहले एक महीने में जांच पूरी नहीं हो पाई, इसलिए यह भी बड़ा सवाल है कि अतिरिक्त एक महीने में समिति अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप पाती है या नहीं।
जांच के लिए समय बढ़ाए जाने के बाद अब राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमेंद्र बिष्ट ने जांच की गति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि राज्य में जांच किस रफ्तार से आगे बढ़ती है, यह किसी से छिपा नहीं है। इस मामले में सरकार से जुड़े बड़े नामों को लेकर भी चर्चाएं हैं और ऐसे में हमें निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच को लेकर भरोसा नहीं है।
कांग्रेस का कहना है कि अगर मामला चढ़ावे और मंदिर व्यवस्था से जुड़ा है, तो जांच जल्द से जल्द पूरी होनी चाहिए। जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल बदरीनाथ चढ़ावा चोरी प्रकरण में एसआईटी की कार्रवाई जारी है और कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति को भी जांच पूरी करने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय मिल चुका है। अब निगाहें 7 सितंबर पर हैं, क्योंकि उस दिन यह साफ होगा कि समिति जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपती है या फिर एक बार फिर जांच की समय सीमा बढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

